सर्दियों के मौसम में बढ़ जाती है इंफ्लूएंजा संक्रमण की संभावना
सीतापुर। ठंड का मौसम पूरे प्रकोप पर है, ऐसे में न सिर्फ आपको ठंड से बचने की जरूरत है, बल्कि अपने लाडले को इंफ्लूएंजा, खांसी, न्यूमोनिया आदि बीमारियों से बचाने की जरूरत है। इस मौसम में यदि आपके लाडले की नाक बह रही है, उसे गले में दर्द है, सांस लेने में परेशानी है साथ ही उसे नींद और भूख भी कम लग रही है तो अाप सतर्क हों जाएं। यह सर्दियों की बीमारी इंफ्लूएंजा हो सकती है, ऐसे में उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
डिप्टी सीएमओ एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएल गंगवार ने बताया कि इंफ्लूएंजा को आमतैार पर पर फ्लू कहा जाता है, दरअसल यह वायरल संक्रमण है।
यह सांस से संबंधित प्रणाली नाक, गला व फेफड़ों पर हमला करता है। इंफ्लूएंजा सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करता है। लेकिन जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनके लिए यह कई बार खतरनाक भी साबित होता है। इसके अलावा उम्र दराज लोग, गर्भवती महिलाएं और बीमार व्यक्तियों को इससे अधिक खतरा है। उन्होंने बताया कि जब भी कोई खांसता, छींकता या बात करता है तब फ्लू के वायरस बूंदों के रूप में हवा में सफर करते हैं। यह बूंदे कई बार सीधे सांस के माध्यम से दूसरों के शरीर में प्रवेश कर उसे संक्रमित कर देती हैं। इसके अलावा कई बार यह बूंदे मेज, कुर्सी, की बोर्ड, माउस जैसी सतहों पर एकत्र हो जाती हैं, और उन्हें छूने के बाद जब संबंधित व्यक्ति अपने संक्रमित हाथों को अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूता है तो उनके भी संक्रमित होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
इंफ्लूएंजा के लक्षण
इंफ्लूएंजा के प्रमुख लक्षण बुखार, मांसपेशियों, सर और शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान, भूख कम लगना, सुस्ती लगना, खांसी, सर दर्द, नाक बहना, सांस लेने में परेशानी और अचानक तेज बुखार हैं।
उपचार
संचारी रोग के प्रभारी डॉ. विवेक सचान बताते हैं कि इंफ्लूएंजा के लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें और चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही दवाओं को सेवन करें। हरी पत्तेदार सब्जियों का नियमित सेवन करें, तरल पदार्थ जैसे सूप आदि पर्याप्त मात्रा में लें, खाने में प्रोटीन दूध, अंडा, पनीर, दाल, चना आदि लें। सांस में
तकलीफ होने पर या डीहाइड्रेशन होने पर शीघ्र ही डॉक्टर की सलाह लें। दिन में कम से कम पांच से छह लीटर पानी पीयें। डॉक्टर के परामर्श से बुखार के लिए पैरासीटामॉल और खांसी व जुकाम के लिए दवाएं लें। जब पीला या हरा बलगम निकल रहा हो, तभी डॉक्टर की सलाह से एंटीबॉयोटिक का प्रयोग करें।
ऐसे करें बचाव
– खांसते या छींकते समय मुंह को ढकें।
– बीमार व्यक्ति को ऑफिस या स्कूल न भेजें।
– तुलसी, अदरक, हल्दी, शहद, आंवला, दालचीनी और गुड़ व चने का प्रयोग करें।
– खाने से पहले अपने हाथों को साबुन-पानी अथवा सैनिटाइजर से अच्छी तरह हाथ साफ करें।