साहित्य सृजन संस्थान बिसवाँ द्वारा आयोजित किया गया विश्व हिन्दी दिवस समारोह
सीतापुर। साहित्यिक, शैक्षिक, सामाजिक सरोकारों को समर्पित संस्था साहित्य सृजन संस्थान बिसवाँ सीतापुर के तत्वावधान में “विश्व हिन्दी दिवस” ई-समारोह का आयोजन संस्थाध्यक्ष संदीप मिश्र सरस की अध्यक्षता में हिंदी दिवस के रूप किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि श्रीकांत त्रिवेदी उपस्थित रहे.
अपने अध्यक्षीय काव्य पाठ में साहित्यकार संदीप मिश्र सरस ने पढ़ा,हमारी मातृभाषा है हमारा प्यार है हिन्दी.
सृजन की साधना है हृदय का उद्गार है हिन्दी.
हमारी भावना को सौंपती है शब्द का संचय, सदा अभिव्यक्ति के सामर्थ्य का आधार है हिन्दी.
मुख्य अतिथि श्रीकांत त्रिवेदी ने सुनाया:- हिंदी में ही निज संस्कृति का, संभव विकास ये कहता है.
लेकिन मेरा सम्मान रहे हर हिंदी भाषी कहता है.
इसका अपमान देखते ही,ये रक्त उबलता रहता है.
सारी भाषाएं साथ रहें ,ये देश खुशी से सहता है.
वाणी वंदना के पश्चात रामकुमार सुरत ने सुनाया, “हिन्दी माथे की बिन्दी, अन्य सभी चिंदी- चिंदी, दूर देश जाकर के भी, हमें मिला देती हिन्दी.
धर्मेंद्र धवल ने पढा,”मन के भाव मुखर हों जब-जब, तब- तब गाएँ हिन्दी में. नफरत और प्रेम दोनों की, हर बात बतायें हिन्दी में. जब तक सम्भव हो तब तक, प्रेम पूर्वक समझा लो, फिर भी बात समझ न आये, तब समझायें हिन्दी में.
युवा कवि आमोद शुभम मिश्र ने पढ़ा, हिन्दी भाषा सबकी भाषा है. सरल सहज सबकी आशा है. पत्थर को पानी बनाती हिन्दी भाषा है। हमारी तुम्हारी सबकी प्यारी भाषा है.
शिवानन्द दीक्षित प्रेमी ने पढ़ा, “जन्म हुआ जब आंख खुली तब, प्यार का शब्द सुना वत हिंदी। भूल गई सब दर्द कराहना मोह का शब्द शिखावत हिंदी. स्वार्थ समाज की व्याकुलता तजी सब्र समाज गढ़ावत हिंदी. बल बुद्धि विवेक छटा की सदा सुनि “प्रेमी “को बोध करावत हिंदी.
कवयित्री दीप्ति गुप्ता दीप ने सुनाया,”जब से जग में आंखें खोली, हिंदी सुनी और हिंदी बोली. हिंदी ही रग रग में समाई, यही राष्ट्र की भाषा भाई.
शिवेंद्र मिश्र शिव ने पढ़ा, हमारी शान है हिन्दी, हमारी जान है हिन्दी. हमारी संस्कृति हिन्दी, हमारा मान है हिन्दी. नही है अन्य भाषा में कोई माधुर्य हिन्दी सा-हमारी चेतना हिन्दी, हमारा गान है हिन्दी.
कवि विजय रस्तोगी ने पढ़ा, जनमानस के मन को भावत, हर जन को भाय गई हिंदी. भारत की पुण्य धरा भायी, जन-जन में छाए गई हिंदी. सूर कबीर की वाणी सुनी,खुद में हरसाय गई हिंदी. मीरा रसखान के गीत सुने, खुद में इठलाय गई हिंदी.
बैकुण्ठ सागर ने सुनाया, “है मान मेरा हिंदी, यशगान मेरा हिंदी. हिंदी है राष्ट्रभाषा पहचान मेरी हिंदी. ये कामना हमारी बन जाये विश्व भाषा, चमके अखिल जगत में फिर देव भाषा हिंदी.
कार्यक्रम में सम्मानित श्रोता के रूप में हरिश्चन्द्र गुप्ता, जी एल गाँधी, आनंद खत्री, मुरारी लाल श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे. कार्यक्रम का सफल संचालन रामकुमार सुरत ने किया. सहप्रभारी धर्मेन्द्र धवल ने आभार व्यक्त किया.
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