Surya Satta
सीतापुर

अपने दर्द को ताकत बना, दूसरों की मददगार बनी ररिता

 

फाइलेरिया जागरूकता के लिए पिछले राउंड में सीएमओ ने किया सम्मानित

सीतापुर। हरगांव ब्लॉक के शेखवापुर गांव की रहने वाली 46 वर्षीय ररिता देवी, पिछले 25 सालों से फाइलेरिया यानी हाथीपांव से जूझ रही हैं। लेकिन अपनी इस बीमारी को उन्होंने कमजोरी नहीं बनने दिया। अपनी कोशिशों से न केवल खुद को संभाला, बल्कि अब दूसरों को भी जागरूक करने में जुटी हुई हैं। बीते साल हुए एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) राउंड के दौरान उन्होंने समुदाय को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया और फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के लिए प्रेरित किया, उनके इन्हीं प्रयासों को देखते हुए सीएमओ हरपाल सिंह ने उन्हें सम्मानित भी किया था।
ररिता बताती हैं कि करीब 25 साल पहले तेज बुखार आया।

फिर मेरे बाएं पैर में सूजन और लालपन आ गया। कई जगह इलाज करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। फिर पता चला कि मैं फाइलेरिया से पीड़ित हूं जिसका कोई इलाज नहीं हैं। वह बताती हैं कि पिछले साल एक संस्था के लोग गांव में आये और उन्होंने फाइलेरिया के बारे में बताया कि यह मच्छर के काटने से होती है। फाइलेरिया से बचना है तो मच्छरों से बचें और साल में एक बार फाइलेरिया से बचाव की दवा जरूर खाएं।

 

संस्था ने गांव में फाइलेरिया रोगियों का समूह बनाया। मैं भी पिछले साल शिवगंगा फाइलेरिया रोगी समूह की सदस्य बनी। जिसमें फाइलेरिया से जुड़ी जानकारी, फाइलेरिया ग्रसित अंगों की सफाई, पैरों की सूजन कम करने के लिए व्यायाम करने का तरीका सीखा जिससे मुझे काफी आराम मिला। इसके बाद मैंने ठान लिया कि अब मैं दूसरों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करूंगी। इसके बाद मैंने गांव में घर-घर जाकर, बैठकों में, कथा-भागवत में, विद्यालय, अस्पताल, सहायता समूह के लोगों के बीच जाकर फाइलेरिया और इससे बचाव की दवा के बारें में लोगों को जागरूक करने का काम शुरू कर दिया।

इंकार परिवारों को खिलाई दवा

ररिता बताती है कि पिछले सप्ताह मेरे पड़ोस में रहने वाले सुनील के परिवार ने फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने से इन्कार कर दिया। उनका मानना था कि जब वो सब बिल्कुल स्वस्थ है तो दवा क्यों खाएं। ऐसे में परिवार को समय लेकर समझाया कि एक बार जो यह बीमारी हो गयी तो कभी ठीक नहीं होती है। अपनी बीमारी से जुड़े कड़वे अनुभव बताकर उन्हें दवाई खाने के लिए समझाया। आखिर वो परिवार राजी हुआ और परिवार के सभी सदस्यों ने फाइलेरिया से बचाव की दवा खाई। गांव की आशा कार्यकर्ता पिंकी देवी बताती हैं कि ररिता दीदी ने जब से अपनी बीमारी का उदाहरण देकर लोगों को समझाना शुरू किया है, तब से गांव के लोग उनकी बातों को गंभीरता से लेते हैं। पिछली बार छह से सात ऐसे परिवार थे जिन्होंने दवा खाने से साफ इन्कार कर दिया तो ऐसे में हमने दीदी की मदद ली। उन्होंने उन सभी परिवारों को समझाकर दवा खाने के लिए राजी किया।

 

सीएमओ ने किया सम्मानित

 

सीएमओ डॉ. हरपाल सिंह ने ररिता के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ररिता और उनके जैसे फाइलेरिया समूह से जुड़े कई अन्य लोग आईडीए अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनकी कहानी और अनुभवों को सुनकर गाँव के लोग दवा लेने के लिए प्रेरित होते हैं। ररिता अपनी दिक्कतों से परे लोगों को फाइलेरिया के प्रति जागरूक कर रही है यह सराहनीय है।

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