लोक-साहित्य की सबसे कठिन विधाओं में है जवाबी कीर्तन: निर्मल वर्मा
सीतापुर। जेष्ठ मास के प्रथम मंगलवार (बुढ़वा मंगल) पर बड़ा हनुमान मंदिर पर जोरदार जवाबी कीर्तन सम्पन्न हुआ। इसमें संडीला के रतिराम ज्ञानी व कानपुर के लालमन चंचल के बीच मुकाबला हुआ। इससे पूर्व हनुमान जी का प्रसाद चढ़ाकर,दीप प्रज्ज्वलन एवं आरती कर मुख्य अतिथि विधायक निर्मल वर्मा ने कीर्त्तन का शुभारंभ किया.
मुख्य अतिथि निर्मल वर्मा ने कहा कि दार्शनिक विषयों , पारंपरिक कथाओं , सामाजिक –कुरीतियों को गीतों में पिरोकर गानें वाले इसके कलाकार त्वरित ही मंच पर अपना गीत गाते है, और दूसरी पार्टी के गीत का जबाव भी तुरंत लिख कर देते हैं. लोक-साहित्य की सबसे कठिन विधाओं में यह एक है. जवाबी कीर्तन को लेकर बाबा विश्वनाथ की नगरी बिसवां का एक गौरवशाली इतिहास रहा है. पुरातन संस्कृति से जुड़े धार्मिक आयोजनों से धर्म के प्रति निष्ठा के साथ जुड़ने का अवसर प्राप्त होता है. साथ ही भौतिकतावदी युग के बीच आमजन में आध्यात्मिकता का संचार होता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में ऐसे आयोजन धर्म के प्रति जागरूकता लाते हैं.संचालन आशुतोष तिवारी व संजीव मिश्र ने किया.
कीर्तनकार रतिराम ज्ञानी एवं कीर्तनकार लालमन चंचल ने कीर्तन को ऊंचाइयां प्रदान की। मुख्य अतिथि निर्मल वर्मा माल्यार्पण व हनुमान जी का स्मृति चिन्ह भेंट कर मंदिर प्रबंधक वीरेश मिश्रा,संयोजक बबलू मिश्रा एवं आयोजक अमूल्य रंजन मिश्रा द्वारा सम्मानित किया गया. मुख्य अतिथि द्वारा समाज की महान विभूतियां शिक्षाविद वृंदारक नाथ मिश्रा, मुकुट बिहारी बाजपेयी, शिक्षाविद राकेश शुक्ला, आनंद मिश्र,रामचंद्र वर्मा,रमेश गौड़,रम्मी,डॉ विनोदनी त्रिपाठी, सुनील रस्तोगी,बबलू जोशी,अनूप श्रीवास्तव,सभासद राम नारायण मिश्रा, विजय कुमार बाजपेई,पंकज गुप्ता,प्रभाकर दत्त वर्मा,सुशील मिश्रा,अनूप श्रीवास्तव,लालता गुप्ता, सुभाष गुप्ता,जगदीश वर्मा, दिनेश गुप्ता, इसरार, नीरज वर्मा, अश्वनी त्रिपाठी, मधुकर वर्मा, अतुल त्रिवेदी, संजीव मिश्रा आदि को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान आशीष मिश्रा, प्रतीक रंजन मिश्रा, लविश रंजन मिश्रा, गजेंद्र शुक्ला, राजेंद्र बाजपेई, सुरेश अवस्थी, श्याम नारायण मिश्रा,मोनू त्रिवेदी आज सहित बड़ी संख्या में कीर्तन प्रेमी मौजूद रहे.