Surya Satta
सीतापुर

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: 1.09 लाख महिलाएं हुई लाभांवित  

सीतापुर। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहली बार गर्भधारण करने वाली महिलाओं को तीन किश्तों में पांच हजार रुपए अलग-अलग शर्तों के साथ दी जाती हैं. इन शर्तों को पूरा करने से गर्भवती व प्रसव के बाद शिशु स्वास्थ्य सुविधाओं की मुख्य धारा से जुड़ जाते हैं और उन्हें सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल जाता है. सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत अब तक 1.09 लाख से अधिक पात्र महिलाओं को लाभ दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि यह योजना जनवरी 2017 में लागू की गयी थी.

शर्तों में ही छिपा है सेहत का खजाना

जिला कार्यक्रम समंवयक अंबरीश दुबे ने बताया कि योजना की पहली शर्त में एक हजार रुपये की धनराशि गर्भवती का पंजीकरण होने पर दिया जाता है ताकि सभी स्वास्थ्य सेवाएं उन्हे समय से मुहैया कराई जा सकें. इसकी दूसरी शर्त में दो हजार रुपये की धनराशि गर्भ के दूसरी तिमाही में गर्भवती की सेहत की जांच होने पर दी जाती है. जांच में जटिलता पाये जाने पर गर्भवती को विशेषज्ञ चिकित्सक के पास इलाज के लिए भेजा जाता है. तीसरी शर्त में दो हजार की धनराशि जन्मे शिशु का पंजीकरण कराने व पहले चक्र का टीकाकरण पूरा करने पर दी जाती है। इससे शिशु को जानलेवा बीमारी टीबी, काली खांसी, टिटनेस, गलघोटू, पोलियो व लीवर की बीमारी हेपेटाइटिस बी से सुरक्षा मिलती है.

आर्थिक तंगी में काम आती है योजना

जिला कार्यक्रम सहायक रेनू त्रिवेदी ने बताया कि आर्थिक व सामाजिक कारणों से कई महिलाएं गर्भावस्था के आखिरी दिनों तक परिवार के लिए जीविका अर्जित करना जारी रखती हैं. इसके अलावा वह बच्चे के जन्म देने के बाद वक्त से पहले काम करना शुरू कर देती हैं, जबकि उनका शरीर इसके लिए तैयार नहीं होता है . ऐसे में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत उन्हे पर्याप्त विश्राम करने के अवसर के साथ ही जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं भी मुहैया हो जाती हैं.

पोषण के साथ मिली सेहत की सुरक्षा

मिश्रिख ब्लॉक के अर्थापुर गांव की रहने वाली शैलेंद्री के पहले बच्चे जन्म 12 मई 2022 को मिश्रिख सीएचसी पर हुआ था. शैलेंद्री बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान पंजीकरण कराने पर उन्हे पहली किस्त एक हज़ार रुपये की मिली. इस दौरान उनकी चार बार जांच हुई, टीडी का टीका लगा, आयरन व कैल्शियम की गोली खाने को मिली और करीब छह माह बाद दो हज़ार रुपए की धनराशि मिली.  आशा के कहने पर बच्चे के जन्म के बाद उसे टीका लगवाया और तीसरी किस्त में दो हज़ार रुपये मिले। इनमें से कुछ पैसे उन्होंने गाय का दूध और पौष्टिक आहार खरीदने पर खर्च किया.

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