आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने किया मंथन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों(Assembly elections in five states including Uttar Pradesh) से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस में धार्मिक यात्रा(Prime Minister Narendra Modi religious visit in Banaras) के दौरान राजनैतिक समीकरणों को साधने में भी जुट गए(also engaged in solving political equations) हैं. शायद यही वजह है कि मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्मेलन से पहले भारतीय जनता पार्टी(BJP) के संगठन को लेकर बीजेपी शासित मुख्यमंत्रियों के अलावा यूपी संगठन के पदाधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण बैठक की है. वहीं मुख्यमंत्रियों के साथ प्रशासनिक भवन में पीएम मोदी मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में शामिल हुए.
इसके पहले गेस्ट हाउस में प्रधानमंत्री ने भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी मंथन किया है. संगठन से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि विधायकों का 5 साल का रिपोर्ट कार्ड देखें. जनता के बीच उनकी पहुंच और लोकप्रियता का फीडबैक संगठन और स्वतंत्र रूप से लिया जाए. इसके बाद कामकाज के आधार पर टिकट तय करने पर अंतिम निर्णय लिया जाए. उम्मीदवारी तय करने में किसी की पैरोकारी या भाई-भतीजावाद को कतई तवज्जो न दिया जाए.
विकास परियोजनाएं नहीं रहनी चाहिए लंबित: PM मोदी

सबसे बड़ी बात यह है कि प्रधानमंत्री के साथ संगठन बैठक में उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष बीजेपी वाराणसी के महानगर और जिला अध्यक्ष, बीजेपी राष्ट्रीय संगठन मंत्री बनारस के छह विधायक समेत बीजेपी क्षेत्रीय अध्यक्ष मौजूद थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी को यह कहा है कि भाजपा के विधायक और सांसद अपने क्षेत्र की विकास परियोजनाओं पर खुद को फोकस करें. देखें कि कहां किस काम में किस वजह से देरी हो रही है, जो भी अड़चन आ रही है उसके लिए प्रशासन और शासन के स्तर पर भागदौड़ कर दूर कराएं. विकास परियोजनाएं लंबित नहीं रहनी चाहिए. सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से संबंधित जनता की समस्या की अनदेखी कतई न करें. जनसमस्याओं का समाधान ही नेता के सदन तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करता है.
जनता से संवाद की कड़ी नहीं चाहिए टूटनी: PM मोदी

पीएम ने कहा कि संगठन के लोग अपनी अलग उपस्थिति बरकरार रखें. अपने क्षेत्र की जनता से रोजाना संवाद की कड़ी टूटना नहीं चाहिए. गांवों, कस्बों, मुहल्लों और कॉलोनियों में छोटी-छोटी चौपालें आयोजित कर प्रदेश और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताने के साथ ही विजन के बारे में भी बताएं. सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर सक्रिय रहें और विपक्षी दलों के नेताओं से होने वाली गलतियों पर पैनी नजर रखते हुए संयमित तरीके से उसे जनता के बीच ले जाएं.