पुरुषों को भी निभानी होगी परिवार नियोजन की जिम्मेदारी
सीतापुर। महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी अधिक सरल और सुरक्षित है. इसलिए दो बच्चों के जन्म में पर्याप्त अंतर रखने के लिए और जब तक बच्चा न चाहें तब तक पुरुष अस्थायी साधन कंडोम को अपना सकते हैं. वहीं परिवार पूरा होने पर परिवार नियोजन के स्थायी साधन नसबंदी को भी अपनाकर अपनी अहम जिम्मेदारी निभा सकते हैं. यह कहना है एसीएमओ (आरसीएच) डॉ. कमलेश चंद्रा का कहना है कि पुरुष नसबंदी चंद मिनट में होने वाली आसान शल्य क्रिया है. यह 99.5 फीसदी सफल है.
इससे यौन क्षमता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है. यदि पति-पत्नी में किसी एक को नसबंदी की सेवा अपनाने के बारे में तय करना है तो उन्हें यह जानना जरूरी है कि महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी बेहद आसान है. वह बताते हैं कि पुरुष नसबंदी होने के कम से कम तीन महीने तक परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों का प्रयोग करना चाहिए, जब तक शुक्राणु पूरे प्रजनन तंत्र से खत्म न हो जाएं. नसबंदी के तीन महीने के बाद वीर्य की जांच करानी चाहिए. जांच में शुक्राणु न पाए जाने की दशा में ही नसबंदी को सफल माना जाता है.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुजीत वर्मा बताते हैं कि सीतापुर जिला मिशन परिवार विकास जनपद में शामिल है. इस जिले में पुरुष नसबंदी करवाने पर लाभार्थी को तीन हजार रुपये उसके खाते में दिये जाते हैं। नसबंदी के लिए पुरुष विवाहित होना चाहिए, उसकी आयु 60 वर्ष या उससे कम हो और दंपति के पास कम से कम एक बच्चा हो जिसकी उम्र एक वर्ष से अधिक हो. पति या पत्नी में से किसी एक की ही नसबंदी होती है. गैर सरकारी व्यक्ति के अलावा अगर आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरक की भूमिका निभाती हैं तो उन्हें भी 400 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाती है. उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 11 पुरुषों ने नसबंदी ऑपरेशन कराया है.
यह भी प्रावधान
परिवार नियोजन कार्यक्रम के प्रबंधक जावेद खान ने बताया कि नसबंदी के विफल होने पर 60,000 रुपए की धनराशि दी जाती है. नसबंदी के बाद सात दिनों के अंदर मृत्यु हो जाने पर चार लाख रुपए की धनराशि दी जाती है. नसबंदी के 8 से 30 दिन के अंदर मृत्यु हो जाने पर एक लाख रुपए की धनराशि दिये जाने का प्रावधान है. नसबंदी के बाद 60 दिनों के अंदर जटिलता होने पर इलाज के लिए 50,000 रुपए की धनराशि दी जाती है.
क्या कहते हैं लाभार्थी
बिसवां निवासी आनंद प्रकाश ने दो बच्चों के बाद करीब तीन साल पूर्व अपनी नसबंदी कराई है. नसबंदी के अपने अनुभवों का साझा करते हुए वह बताते हैं कि हल्की एनेस्थिसिया दी जाती है जिससे दर्द नहीं होता. चंद मिनट में नसबंदी हो जाती है. नसबंदी के बाद आदमी अपने दैनिक कार्य कर सकता है. दो बच्चों के पिता और शहर के निवासी राकेश चंद्र कहते हैं कि वह कंडोम का इस्तेमाल करते हैँ और इससे यौन संपर्क पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है.