मातृ वंदना सप्ताह शुरू, कई महिलाओं के हुए पंजीकरण
लखीमपुर। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के तहत नए पंजीकरण और योजना से संबंधित सभी लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए सोमवार से मातृ वंदना सप्ताह शुरू हो गया है.
नोडल अधिकारी ने जिला मुख्यालय पर शुरू किया मातृ वंदना सप्ताह
मातृ वंदना योजना सप्ताह की शुरूआत जिला मुख्यालय पर योजना के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ बीसी पंत ने की. उन्होंने नए पंजीकरण से मातृ वंदना सप्ताह की शुरूआत की है. इसके अलावा कार्यक्रम समन्वय निशा मिश्रा ने जिले के बांकेगंज स्थित सीएचसी पर की है. एसीएमओ डॉ बीसी पंत ने बताया कि केंद्र सरकार की इस योजना के तहत पहली बार गर्भवती होने पर महिलाओं को पोषण के लिए तीन किस्तों में पांच हजार रुपए धनराशि दी जाती हैं.
योजना का लाभ लेने के लिए गर्भवती को अपने नजदीकी स्वास्थ्य इकाई पर पंजीकरण कराना होता है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना सप्ताह के दौरान पंजीकरण शिविर और बैकलॉग निस्तारण कैंप जिले के स्वास्थ्य इकाइयों पर आयोजित किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि सीएचसी अधीक्षक व पीएचसी के प्रभारियों को मातृ वंदना सप्ताह के कार्यक्रमों को लेकर पहले ही तैयार रहने की निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि तैयारियां पहले से ही थीं.
27 मार्च तक चलेगा मातृ वंदना सप्ताह
आज यानी 21 मार्च से मातृ वंदना सप्ताह की शुरूआत हुई है। 27 मार्च तक यह सप्ताह चलेगा. जिसमें पंजीकरण शिविर और लंबित प्रकरणों के निस्तारण को लेकर कैंप का आयोजन किए जा रहे हैं. नए पंजीकरण के साथ ही वार्षिक पंजीकरण भी किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस योजना का लाभ लेने वाली मात्र महिलाएं अपना पंजीकरण कराएं और योजना का लाभ लें.
पहले दिन हुए कई पंजीकरण
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जिला कार्यक्रम समन्वयक निशा मिश्रा ने बताया कि उन्होंने स्वयं बांकेगंज पहुंच कर मातृ वंदना सप्ताह की शुरूआत करते हुए कई नए पंजीकरण कराएं हैं. सप्ताह की शुरूआत के कुछ घंटों में पांच नए पंजीकरण कराए गए हैं. इसके लिए प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है. एक सप्ताह तक नए पंजीकरण के साथ ही लंबित प्रकरणों का निस्तारण भी किया जाएगा. उन्होंने बताया कि जिले का लक्ष्य एक लाख 12 हजार 282 निर्धारित था. जिसमें से अब एक लाख 176 महिलाओं को इस योजना में पंजीकृत किया जा चुका है. पात्र महिलाओं को लाभ पहुंचाने का तकरीबन 89 फीसदी लक्ष्य पूरा हो चुका है. लाभार्थियों को लगातार किस्तों का भुगतान किया जा रहा है.