आ गया मुझको होश- हवास, इसलिए मैं आज बहुत खुश हूँ
सहित्य।
मुझको वह अंत मिल गया,
जिसकी मुझको जरूरत थी,
इस मुलाकात को खत्म करने में,
इस कहानी को खत्म करने में,
इस तकरार को खत्म करने में,
और इस दुःख के अंत के लिए,
मुझको चाहिए था इसका कारण,
वह कारण मुझको मिल गया,
इसलिए मैं आज बहुत खुश हूँ।
मैं हो गया अब जी आज़ाद,
मिल गई है मुक्ति मुझको,
बर्बादी और सारी चिंताओं से,
मिट गए मेरे सारे गमों- दर्द,
हो गए मेरे चिराग रोशन,
महक गया अब मेरा चमन,
इसलिए मैं आज बहुत खुश हूँ।
कभी नहीं पिलाया था मुझको पानी,
जब था मैं प्यासा एक-एक बून्द को,
कभी नहीं दी मुझको इज्जत,
स्वार्थी और लालची उन लोगों ने,
जिनको मैं मानता था अपना साथी,
अब आ गए मुझको वह समझ में,
और आ गया मुझको होश- हवास,
इसलिए मैं आज बहुत खुश हूँ।
शिक्षक एवं साहित्यकार-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
मोबाईल नम्बर- 9571070847