सुरक्षित गर्भ समापन, परिवार नियोजन व एमटीपी एक्ट की दी जानकारी
श्रावस्ती : साझा प्रयास नेटवर्क के तत्वावधान में गिलौला सीएचसी पर जागरूकता स्टॉल लगाया गया. इसके तहत सीएचसी पर आने वाली महिलाओं को सुरक्षित गर्भ समापन, परिवार नियोजन और एमटीपी एक्ट संशोधन 2021 के बारे में जानकारी दी गई. इस मौके पर आठ महिलाओं ने नसबंदी की सेवा अपनाई।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दीपक शुक्ला ने बताया कि गर्भ का चिकित्सकीय समापन (संशोधन) नियम, 2021 के अनुसार यौन उत्पीड़न या बलात्कार की शिकार, नाबालिग अथवा गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव हो गया हो (विधवा हो गई हो या तलाक हो गया हो) या फिर गर्भस्थ शिशु असमान्य हो ऐसी स्थिति में महिला 24 सप्ताह की अवधि के अंदर गर्भपात करा सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि 20 सप्ताह तक के गर्भ समापन के लिए एक पंजीकृत चिकित्सक और 20 से 24 सप्ताह के गर्भ समापन के लिए दो पंजीकृत चिकित्सकों की राय आवश्यक होगी इसके साथ ही अविवाहित महिलाएं भी गर्भनिरोधक साधनों की विफलता होने पर गर्भ समापन करा सकती हैं.
आईपास की ट्रेनिंग ऑफीसर चंचल ने कहा कि गर्भ समापन के बाद इमोशनल साइड इफेक्ट्स कोई बड़ी बात नहीं है. गर्भ को खत्म करने का फैसला शायद ही किसी महिला के लिए आसान होता है. लेकिन प्रदेश की 85 प्रतिशत महिलाएं अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए आज भी दवाओं को प्रयोग करती हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. यही नहीं परिवार नियोजन यानी फेमिली प्लानिंग की जानकारी न होने की वजह से 49 प्रतिशत महिलाओं को गर्भ ठहर जाता है. इनमें से 64 प्रतिशत महिलाएं गर्भपात करवाने की कोशिश करती हैं. इस मौके पर डॉ. विजय कुमार, बीसीपीएम अजीत यादव, परिवार नियोजन काउंसलर पूनम शर्मा आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहीं.