Surya Satta
सीतापुर

बेसहारा गौवंश पर भारी पड़ रही आला अधिकारियों की अनदेखी  

सीतापुर। भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार के तमाम वादे आश्रय की तलाश में वर्षों से सड़कों पर भटकते गौवंश के किसी काम नहीं आ रहे,तो वहीं आला अधिकारियों की अनदेखी गौवंश की बेबसी पर भारी पड़ रही है.
 सरकार की सब कुछ फ्री वाली तमाम योजनाओं का लाभ लेने वाले लोग दूध लेकर गौवंश को सड़कों पर भटकने के लिए छोड़ रहे हैं. बेसहारा गौवंश भूख प्यास से बेहाल होकर जब अपना पेट भरने के लिए खेतों की ओर रुख करते हैं,तो फसलों की सुरक्षा के लिए खेत की मेड पर लगाई गई चाइनीज कँटीली बाड़ में फंस कर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और समुचित इलाज के अभाव में तड़प तड़प कर दम तोड़ देते हैं.
  मनरेगा से गाँवों में सैकड़ों की संख्या में कैटल शेड गौवंश के संरक्षण के नाम पर लोगों को दिए गए हैं,लेकिन अधिकांश कैटल शेड में अब तक एक भी गौवंश को आश्रय नहीं मिल पाया है. जिन ग्रामीणों को गौपालन के लिए कैटल शेड दिया गया है उनमें से अधिकांश लोगों ने दूध लेकर अपने गौवंश सड़कों पर बेसहारा छोड़ दिए हैं. कहने को तो सकरन क्षेत्र में लाखों रुपए खर्च कर कई अस्थाई गौशालाओं का निर्माण कराया गया है. लेकिन गौशालाओं में संरक्षित गौवंश को कभी भी पेट भर चारा पानी नसीब नहीं हो पाया.
 यहां भी भूख प्यास से कुपोषित होकर तमाम गौवंश असमय मौत के मुंह में समा गए. गौशालाओं में संरक्षित गौवंश को हरे चारे की उपलब्धता के लिए तमाम चरागाहों में नेपियर घास और अन्य चारे की बुवाई तो कराई गई लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी से चरागाहों मे हरे चारे का उतना भी उत्पादन नहीं हो सका जितना सरकारी धन उस पर खर्च कर दिया गया. अब ऐसी परिस्थितियों में बेसहारा गौवंश का जीवन कैसे बचेगा शायद ही कोई जिम्मेदार इसका जवाब देना मुनासिब समझे.

चाइनीज ब्लेड युक्त कटीली बाड़ के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की ग्रामीणों ने की मांग

 बेसहारा गौवंश के साथ वन्य जीव जंतुओं के लिए काल बनी चाइनीज ब्लेड युक्त कटीली बाड़ जिससे गौवंश के साथ वन्य जीव नीलगाय, हिरण, बारहसिंघा आदि की गंभीर रूप से कट कर दर्दनाक मौत हो रही है. इसके उपयोग पर सकरन क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सरकार से प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है.

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