पयामे इन्सानियत फोरम के बैनर तले मनाया गया मानवता पर्व
सीतापुर : आज हिंसा और टकराव का दानव हमारे सामने मुंह खोले हैं। साम्प्रदायिकता फन उठाये खड़ी हुई है, जिसने हमारे सामने बहुत बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. इस खतरे को रोकने व देश की मुश्तरका संस्कृति को बचाये रखने के लिए संतो, मौलानाओं, लेखकों, दार्शनिकों को एकजुट होकर प्रेम का दीप प्रज्ज्वलित किये जाने की आवश्यकता है.
यह बात ऑल इंडिया पयामे इंसानियत फोरम की तरफ से रविवार को ग्राम गड़िया हसनपुर में आयोजित ”हमारा समाज हमारी जिम्मेदारी” विषयक गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ0 उमंग खन्ना ने कही.
मुख्य अतिथि ने कहा कि पयामे इंसानियत फोरम अपने उल्लेखनीय कार्यों के चलते मेरे दिल में बसता है. समाज के लिए जो जिम्मेदारी है उसे आप सब निर्वाह कर रहे हैं. यह संगठन धर्म तथा संप्रदाय में भेदभाव किये बिना समाज के उत्पीड़ित, पिछड़े निर्धन एवं व्याकुल जनों से सम्पर्क स्थापित कर यथासंभव उन्हें सहायता देता है.
गोष्ठी का आधार वक्तव्य देते हुए मुफ्ती जुबैर नदवी ने गोष्ठी के विषय पर प्रकाश डाला. मुख्य संयोजक मो0 फारूक व प्रधान प्रतिनिधि खुर्शेद, फहीम, आदि ने विशिष्ट मेहमानों को शाल ओढ़ाकर, प्रतीक चिन्ह दिया.
विशिष्ट अतिथि आचार्य शशि प्रकाश शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को मस्तिष्क मिला है. वर्ना हममें और पशुओं में कोई अंतर नही हैं। हमें अपने आचरण से मनुष्यता को बचाने वाले कार्य करने चाहिए. अपने बच्चों को अच्छी संस्कारवान शिक्षा देनी चाहिए. बच्चे हमारे व्यवहार की कार्बन कापी होते हैं. हमें समाज में कोई ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए, जो गरिमा के विपरीत हो, धर्म के विपरीत हो. हर इंसान के भीतर इंसान दिखना चाहिए.
विशिष्ट अतिथि मौलाना कौसर नदवी ने कहा कि देश में घट रही घटनाओं व सोशल मीडिया ने हमारे समाज के ताने-बाने को चकनाचूर कर दिया है. राजनीति ने इस विष वेलि को और बढ़ाया है. कलम कैंची बन गया है. जबकि हमें सुई बनकर रहना चाहिए। सुई दो को एक कर देती है और कैंची एक को दो कर देती है. आज नफरत का माहौल बढ़ रहा है.
नफरत एवं हिंसा के खिलाफ मानवीय एकता संगठन के स्थानीय संयोजक अनुराग आग्नेय ने अपने वक्तव्य में कहा कि देश में साम्प्रदायिक एकता के जरिये ही समाज को बचाया जा सकता है. जब तक हिन्दू मुस्लिम के बीच साम्प्रदायिकता व दंगे के बीज विद्यमान रहेंगे, तब तक दोनों समुदायों में एकजुटता नहीं पैदा होने वाली है. मानवीय एकता की बुनियाद सिर्फ प्रेम, मुहब्बत, भाईचारे से डाले जा सकती है. चन्द्रशेखर प्रजापति ने कहा कि अपने स्वार्थों की सिद्धि के लिए किसी का खून बहाना नहीं चाहिए बल्कि आदमियत को बचाने के लिए रक्त दान करना चाहिए. यही मानवता के लिए सच्ची सेवा है.
गोष्ठी को मौ0 खलीक अहमद नदवी, मौ0 मो0 उमर नदवी, सै0 मोईद अहमद, देवेन्द्र कश्यप निडर, सूर्यांश शुक्ल आदि ने भी संबोधित किया। इस मौके पर हाजी शफीक, अली बाबा, शमीमुर्रहमान आदि लोग उपस्थित रहे.