Surya Satta
सीतापुर

साहित्य सृजन संस्थान द्वारा मानवाधिकार विमर्श संगोष्ठी का आयोजन 

 

सीतापुर : सामाजिक शैक्षिक साहित्यिक सरोकारों को समर्पित अखिल भारतीय संस्था “साहित्य सृजन संस्थान” द्वारा बिसवां नगर में स्थापित “सृजन पुस्तकालय” में मानवाधिकार दिवस की पूर्व संध्या पर एक विमर्श संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

कार्यक्रम अध्यक्ष रामपाल त्रिपाठी ने कहा कि भारत में मानवाधिकारों की चुनौतियों का समाधान तत्काल करने की आवश्यकता है.

मुख्य अतिथि सहदेव तिवारी ने कहा कि मीडिया और नागरिक समाज संगठनों को मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों को सामने लाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए.

साहित्यकार संदीप मिश्र सरस ने कहा कि हम दुनिया में सबसे बड़ा लोकतंत्र स्थापित करने में सफल रहे हैं, लेकिन अभी तक अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाए हैं, जो हमारे लोकतंत्र के लिए आवश्यक पूर्वापेक्षाएं हैं.

विचारक वृंदारकनाथ मिश्र ने कहा कि जब तक मौलिक मानवाधिकारों का सम्मान शासन का आधार नहीं बनता, तब तक समाज की वास्तविक अर्थों में कोई प्रगति संभव नहीं.

शिक्षाविद राकेश शुक्ला ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना एक सभ्य समाज के अस्तित्व की सबसे बुनियादी आवश्यकताएं हैं.

द्वितीय चरण में समायोजित काव्य गोष्ठी में राम कुमार रसिक ने कहा :- सच कहता तेरी यादों में खो जाता हूं मैं। थोड़ा थोड़ा तब से पागल हो जाता हूं मैं.

विजय रस्तोगी ने कहा :- काहे को तू बौराए ऐ मनवा! काहे को तू बौराए.

आमोद मिश्र ने कहा :- ध्यान सबको रहे दीप के मान का। नाश हो जग से तम और अज्ञान का.

धर्मेंद्र त्रिपाठी धवल ने कहा :- कभी कभी मैं, कुछ शब्दों को जोड़ लेता हूं। कभी कभी मैं कुछ भावों को मोड़ लेता हूं.

रोहित तिवारी ने कहा :- यातायात के नियमों का करें हम सभी पालन .
अपने और अपनों के लिए करें त्वरित नियमों का पालन .

संदीप यादव सरल ने कहा :-नेह का ईंट गारा लगा प्रेम से. तू  इमारत नहीं घर बना प्रेम से.

कार्यक्रम का संचालन युवा कवि आमोद शुभम मिश्र ने किया और आभार प्रदर्शन इकाई प्रभारी रामकुमार रसिक ने किया.

कार्यक्रम में अधिवक्ता मनोज गुप्त, ज्ञानेंद्र कश्यप, रविन्द्र वर्मा, शिवांशु पाण्डेय, हीरालाल यादव, कुलदीप यादव आदि साहित्यानुरागी उपस्थित रहे.

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