अलग मातृभाषी होकर भी भोजपुरी साहित्य के ‘विकिपीडिया’ बने डॉ. ब्रजभूषण मिश्रा
भोजपुरी भाषा और साहित्य को अकादमिक गरिमा दिलाने वाले विद्वानों में डॉ. ब्रजभूषण मिश्रा का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। बज्जिका मातृभाषी होते हुए भी उन्होंने आजीवन भोजपुरी भाषा की सेवा कर साहित्यिक जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। अपनी असाधारण स्मरणशक्ति, गहन संदर्भ-ज्ञान और व्यापक अध्ययन के कारण वे स्नेहपूर्वक ‘भोजपुरी का विकिपीडिया’ कहलाते हैं।
डॉ. ब्रजभूषण मिश्रा का जन्म आज के ही दिन 22 दिसंबर 1954 को बिहार के मुजफ्फरपुर जनपद स्थित ग्राम करैल में हुआ था। उन्होंने हिंदी विषय में एम.ए. और पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध-कार्य ‘भोजपुरी प्रबंध-काव्य : वस्तु और शिल्प’ भोजपुरी साहित्य को शास्त्रीय आलोचना की कसौटी पर स्थापित करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास माना जाता है।
कवि, आलोचक, शिक्षक, संपादक और पाठ्यक्रम-निर्माता के रूप में उनका साहित्यिक व्यक्तित्व बहुआयामी है। उन्होंने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के अंतर्गत रामानंद नंदन सहाय महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर में भोजपुरी विभाग में एक दशक से अधिक समय तक अध्यापन किया। सरकारी सेवा में रहते हुए भी भोजपुरी भाषा के प्रति उनकी सक्रियता और प्रतिबद्धता उल्लेखनीय रही।
‘दु-रंग’, ‘अष्टक के कथा ग़ज़ल’, ‘भोजपुरी काव्य में अलंकार-सम-छंद’ जैसी कृतियाँ उनके रचनात्मक और आलोचनात्मक योगदान की सशक्त मिसाल हैं। इसके साथ ही इग्नू, नालंदा खुला विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों के लिए पाठ्यक्रम निर्माण में उनका योगदान भी महत्त्वपूर्ण रहा है।
‘भोजपुरी शिरोमणि’ और ‘नागार्जुन सम्मान’ सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित डॉ. ब्रजभूषण मिश्रा आज भी भोजपुरी भाषा के जीवंत प्रहरी और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

