Surya Satta
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राजू श्रीवास्तव को इलेक्ट्रॉनिक मिडिया में आरंभिक काल से हास्य को प्रसिद्धि दिलाने के लिए किया जायेगा याद  

 

( दिनेश प्रसाद सिन्हा, साउथ अफ्रीका से)
राजू श्रीवास्तव ने अभिनय की दुनिया में 80 के दशक में क़दम रखा। उन्होंने जब हास्य इलेक्ट्रॉनिक मिडिया में स्थान नहीं बनाया था तब इसकों सफल हो घर घर पहुंचवाया.

उन्हें सबसे ज़्यादा शोहरत छोटे पर्दे से मिली।2005 में ‘द ग्रेट इंडियन लाफ़्टर चैलेंज’ में हिस्सा लेने के बाद उन्हें ख़ास तौर पर हिंदी बोलने समझनेवाले दर्शकों के बीच पहचान मिलने लगी.

गजोधर भैया के किरदार में वह काफ़ी लोकप्रिय हुए. राजू श्रीवास्राजू श्रीवास्तव ने तव इस किरदार के माध्यम से आम भारतीयों के जीवन से जुड़े पहलुओं को उठाते थे, जिन पर हर कोई हँसने के लिए मजबूर हो जाता था.

राजू श्रीवास्तव ने फ़िल्मों में भी काम किया था. वह ‘मैंने प्यार किया’, ‘बाज़ीगर’ और ‘आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया’, जैसी फ़िल्मों में भी छोटे किरदार में दिखे. वे उत्तर प्रदेश फ़िल्म विकास परिषद के चेयरमैन थे।
उत्तर प्रदेश के कानपुर के मूल निवासी राजू श्रीवास्तव ने पिछले दशक में राजनीति में भी हाथ आज़माया.
वो समाजवादी पार्टी से कुछ वक़्त जुड़े रहने के बाद 2014 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे.
2014 के चुनावों के समय उन्हें कानपुर से समाजवादी पार्टी का टिकट मिलने की चर्चा उठी थी. मगर उन्होंने पार्टी की स्थानीय इकाई से समर्थन नहीं मिलने की बात कर पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया. हालाँकि, भाजपा ने इस चुनाव में दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी को उतारा जो विजयी रहे.

”सुप्रसिद्ध हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव जी का एक विशिष्ट अंदाज़ था, उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया. उनका निधन कला जगत के लिए एक बड़ी क्षति है. मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ.

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