तकनीकी पहलुओं को अपनाने से फसलों की लागत में आएगी कमी
सीतापुर। कृषि विज्ञान केन्द्र अम्बरपुर सीतापुर(Krishi Vigyan Kendra Amberpur Sitapur) के मार्गदर्शन में इंटीग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ(Integral University, Lucknow) की कृषि स्नातक चतुर्थ वर्ष की छात्राओं के ग्रामीण कृषि कार्यानुभव कार्यक्रम(Rural Agriculture Work Experience Program) को लेकर केन्द्र द्वारा संजना गुप्ता के नेतृत्व(Led by Sanjana Gupta) में रंजना साहू एवं मोनिका यादव के समूह को सिधौली विकास खण्ड का अलमापुर गांव आवंटित किया गया था.
छात्राओं ने केन्द्र के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत के आधारभूत आंकड़ों का संकलन किया, खेती किसानी की परिस्थितियों, किसानों की समस्याओं आदि का ग्रामवासियों के सहयोग से विधिवत अध्ययन किया एवं विशेष गतिविधि के अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को खेल-कूद के प्रति जागरूक किया. कार्यक्रम के अन्त में किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने एवं उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करने हेतु एक कृषि गोष्ठी का आयोजन भी किया गया.
किसान गोष्ठी में दी गई तकनीकी जानकारी

गोष्ठी की शुरुआत में रंजना साहू ने गोष्ठी में आए हुए अतिथियों एवं महिला एवं पुरूष किसान भाइयों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला. तत्पश्चात सभी छात्राओं ने अपने द्वारा किए गए कार्यों एवं किसानों की समस्याओं पर चर्चा की. तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने एकीकृत कृषि प्रणाली, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट के कारण एवं उनके सुधारात्मक उपाय, फसलों की लागत कम करने, गुणवत्तायुक्त उत्पादन में वृद्धि एवं उचित मूल्य प्राप्त करने के तकनीकी बिंदुओं पर चर्चा करते हुए फलों तथा सब्जियों में मूल्य संवर्धन पर जानकारी प्रदान की.
अधिक मूल्य प्राप्त करना है तो फसल उत्पादों में मूल्य संवर्धन करना होगा: डॉ. विनोद कुमार सिंह

डॉ. विनोद कुमार सिंह ने अपने सम्बोधन में किसानों को सुझाव दिया कि यदि आप लोग खेती – किसानी के तकनीकी पहलुओं को ध्यानपूर्वक अपनाएंगे तो अवश्य ही फसलों की लागत में कमी आएगी तथा सही समय पर गतिविधियों को करने एवं उचित देखभाल करने पर गुणवत्ता युक्त उत्पादन में वृद्धि होगी जिसके फलस्वरूप बाजार में उसका उचित मूल्य प्राप्त होगा. यदि बाजार में हमें और अधिक मूल्य प्राप्त करना है तो फसल उत्पादों में मूल्य संवर्धन करना होगा. कृषि को उद्यम का रुप देने एवं टिकाऊ बनाने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाना आवश्यक है जिससे किसानों की आय तो दोगुनी होगी ही साथ ही साथ समय-समय पर धनार्जन होता रहेगा जिससे कभी भी धनाभाव का सामना नहीं करना होगा.
वैज्ञानिकों ने किया किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान

वैज्ञानिक अमरनाथ सिंह ने पशुओं की साफ सफाई, फसल अवशेष प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी प्रदान की. गृह विज्ञान विशेषज्ञ ऋचा सिंह ने कुपोषण पर प्रकाश डालते हुए कुपोषण के कारण एवं उनके निवारण की विस्तृत जानकारी प्रदान की साथ ही साथ शिशुओं हेतु पोषक आहार बनाने की विधि पर भी चर्चा की. अंत में किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया.
इस अवसर पर अलमापुर गांव के प्रधान, प्रगतिशील महिला एवं पुरुष किसानों ने छात्राओं द्वारा गांव में किए गए कार्यों की सराहना की तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना की. कार्यक्रम के अन्त में संजना गुप्ता ने समस्त आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया.